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गुरुवार, 12 जनवरी 2012

तेरे होने का मतलब





तेरे होने का मतलब
मैंने मौसम से पूछा था
गुस्से में वो कभी गर्म हुआ
फिर बारिश की बूंद बनकर
झमाझम इतराने लगा
फिर भी जब मैं
नासमझ बन बैठा तो
वो शरमा के सर्द हवा सी ठंढ़ी पड गई
मौसम के इस असर का मुझको
एहसास होने लगा
फिर भी तेरे वजूद को
मैं समझ नहीं पाया
अब सर्द हवाओं के संग
जब बहारें हसीन होने लगी हैं
तब समझ पाया हूं मैं
कि तुम्हारा वजूद
हर मौसम में मेरे अंदर था
तुम्हारे बारे में मौसम से पूछना
शायद तुम्हे अच्छा नहीं लगा
इसलिए अपने गुस्से से तूने
मौसम को गर्म कर दिया था
फिर तेरे बारे में सोचकर
जब मैं बेचैन हो उठा
तुम बारिश की बूंद बनकर
मुझे छूकर गुजर गई थी
तेरे होने का तब भी मुझे
जब यकीन ना हुआ
तो तुम सर्द हवा बनकर
मेरे अंदर उतर गई
अब तेरा अपने अंदर होना
मैं महसूस करता हूँ
तो तुम खुश हो इतना
कि मौसम के खजाने से
बहारों के रंग चुराकर तूने
नीले आसमान और श्वेत धरा पर भर ड़ाले हैं
तभी तो आज मौसम बसंती हो गया है
और तुम मेरे अंदर
चहकती, महकती, बसंती एहसास बन गई हो ।

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