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मंगलवार, 4 जनवरी 2011

बिहार में बीजेपी विधायक राजकिशोर केसरी की हत्या




आज बिहार के पुर्णियॉ जिले में बीजेपी विधायक राजकिशोर केसरी की हत्या रुपम पाठक नाम की महिला ने विधायक के आवास पर हीं चाकू से गोदकर कर दी। विधायक के घर पर यह महिला उनसे मिलने पहुँची थी। जहॉ लोगों के सामने रुपम पाठक ने विधायक को चाकू मार दिया। विधायक को तत्काल अस्पताल ले जाया गया जहॉ विधायक राजकिशोर की मौत हो गई।
राजकिशोर चार बार से लगातार इस क्षेत्र के विधायक थे। अभी हाल हीं में समपन्न बिहार विधान सभा चुनाव में भी राजकिशोर चौथी बार इस क्षेत्र से बीजेपी की टिकट पर विधायक चुने गये थे। राजकिशोर का घर पुर्णियॉ के मधुबनी मुहल्ले में है। जहॉ सुबह विधायक राजकिशोर अपने आवास पर लोगों से मिल रहे थे। वहीं रुपम पाठक भी इनसे मिलने आयी थीं। जब विधायक से रुपम पाठक के मिलने की बारी आयी तो उसने विधायक से एकांत में बात करने की इच्छा जाहिर की। विधायक जब महिला के साथ अन्य लोगों से दूर हटकर बात कर रहे थे तो रुपम पाठक ने साल से ढ़ंककर लायी गयी चाकू से विधायक पर वार कर दिया। इस घटना से गुस्साऐ लोगों ने रुपम पाठक की जमकर पिटाई कर दी और पुलिस के घटनास्थल पर आते हीं उसे पुलिस के हवाले कर दिया।
दूसरी तरफ घायल विधायक को जब उठाकर पुर्णियॉ के अस्पताल में लाया गया तो वहीं अस्पताल में विधायक राजकिशोर ने दम तोड़ दिया।
महिला द्वारा विधायक की हत्या किये जाने का अभी तक कोई ठोस कारण का पता नहीं चल पाया है। बताया जाता है कि एक साल पहले इस महिला रुपम पाठक ने विधायक राजकिशोर के खिलाफ बलात्कार का मुकदमा दर्ज कराया था लेकिन थोड़े दिनों बाद हीं इस महिला ने यह शिकायत वापिस ले ली थी। यह महिला रुपम पाठक पुर्णियॉ में स्कूल चलाती हैं। रुपम पाठक ने विधायक पर आरोप लगाते समय बताया था कि विधायक राजकिशोर उनके स्कूल में एक कार्यक्रम के दौरान आये थे जहॉ रुपम पाठक की बात राजकिशोर से स्कूल के सामने से गुजरने वाली सड़क को लेकर हुई थी। इसी काम के लिए आवेदन लेकर वह विधायक के घर पर गई थीं जहॉ राजकिशोर द्वारा उनका यौन शोषण किया गया ।यह इल्जाम लिखित रूप से इस महिला ने पुलिस को सौंपी और थोड़े हीं दिनों बाद महिला रुपम पाठक ने यह शिकायत वापिस भी ले लिय़ा। पुलिस के आला अफसर भी मानते हैं कि महिला रुपम पाठक द्वारा राजकिशोर पर लगाया गया इल्जाम गलत था और फिर रुपम पाठक ने मामले की शिकायत को खुद वापिस ले लिया था।ऐसे में राजकिशोर को पुलिस इस मामले में क्लीनचिट दे दी, क्योंकि पीड़िता ने खुद इस मामले से हाथ खींच लिया था।
विधायक राजकिशोर बिहार के तात्कालिन उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के बड़े करीबी लोगों में से थे। इस घटना की खबर मिलते हीं
उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी पूर्णियॉ के लिए रवाना हो गये। सुशील मोदी ने राजकिशोर पर महिला द्वारा लगाये गये सारे इल्जामों को एक सिरे से खारिज करते हुए कहा कि राजकिशोर पर लगाये गये सारे इल्जाम गलत थे क्योंकि महिला ने खुद से शिकायत वापिस ले लिया था।ऐसे में उस महिला ने इस तरह रारकिशोर की हत्या क्यों की यह तो उस महिला से पुलिस द्वारा पुछताछ के बाद हीं पता चल पायेगा।
पूरे घटनाक्रम पर नजर ड़ालें तो सवाल यह उठता है कि महिला ने कानून के सामने दायर की गई अपनी शिकायत वापिस क्यों ले ली और फिर महिला ने कानून को हाथ में लेकर इतना बड़ा जघन्य अपराध क्यों कर ड़ाला ? क्या उसका अपराधी वहॉ के सत्ता से जुड़ा हुआ आदमी था इसलिए उसे न्याय न मिल पाने का अंदेशा था जिस कारण उसने कानून को हाथ में लेने की गलती की?
इन सवालों के अलावा कुछ सवाल बिहार में न्याय और सुशासन के नारे पर चल रही नीतिश सरकार पर भी उठता है।क्या वाकई बिहार में सुशासन है? क्या महिला ने सरकार की तरफ से न्याय न मिल पाने के कारण हीं यह कदम उठाई है? महिला के शिकायत के बाद भी क्यों प्रशासन ने एक सटीक कदम इस घटनाक्रम पर नहीं उठाया ? विधायक पर बलात्कार के आरोप का सच क्या है? बलात्कार के केस को क्यों दबाया गया? पुलिस ने किस दबाब में केस की जांच नहीं की? क्या महिला का विश्वास कानून व्यवस्था से उठ गया था? ऐसे तमाम सवालों के जबाब खोजने की जरूरत है और इन सवालों की सत्यता का पता निष्पक्ष जॉच के बाद हीं संभव है।

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