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गुरुवार, 6 जनवरी 2011

बोफोर्स मामले में सीबीआई को न्यायालय की फटकार




बोफोर्स रक्षा सौदे में दिल्ली में आज सीबीआई द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट पर तीस हजारी अदालत ने सीबीआई को फटकार लगा दी। सीबीआई की निष्पक्षता पर भी अदालत ने कई सबाल खड़े कर दिये। साथ हीं अदालत ने यह फैसला भी सुनाया कि अभी इस मुद्दे पर क्लोजर रिपोर्ट नहीं दी जायेगी और केस पर फिर से नये सिरे से सुनवाई होगी।
इससे पहले सीबीआई ने कोर्ट के सामने बोफोर्स रक्षा सौदे में क्वात्रोची के खिलाफ चल रहे केस की फाइल को बंद करने की अपील के लिए दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में याचिका दायर की थी जिस पर सुनवाई के लिए अदालत ने 6 जनवरी का वक्त तय किया था। कोर्ट ने सीबीआई से इस मामले की तहकीकात को बंद करने के लिए सरकार की तरफ से चिट्ठी की मांग की थी ताकि सरकार और सीबीआई द्वारा इस मामले पर दोनों के नजरिये से अदालत वाकिफ हो सके।
गौरतलब है कि सीबीआई के क्लोजर याचिका पर तीस हजारी अदालत द्वारा अपनी प्रतिक्रिया सुरक्षित रखने के ठीक बाद हीं आईटीएटी ने इस मुद्दे पर कई अहम खुलासे किये थे।बोफोर्स रक्षा सौदे में अपने अहम फैसले में इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल(आईटीएटी) ने कमीशन बाजी के खेल की बात मानी थी।आईटीएटी ने माना कि बोफोर्स रक्षा सौदे में चौसठ करोड़ की रकम को बोफोर्स कम्पनी द्वारा विन चड्डा और क्वात्रोची के स्विस बैंक के अकाउंट में भुगतान किया गया था।
बोफोर्स रक्षा सौदे में सीबीआई के वकील ने केस को बंद करने की अपील पर अदालत में अपनी सफाई में कहा कि पच्चीस साल पुराने मामले में कोई भी नतीजा निकाल पाना संभव नहीं है, उपर से भारत में क्वात्रोची का प्रत्यर्पण भी कोई सरकार इस अवधि के दरम्यान नहीं करा सकी ऐसे में इस केस की कार्यवाही पर सीबीआई द्वारा की जा रही छानबिन का कोई फायदा नहीं है ऐसे में माननीय न्यायालय सीबीआई को इस केस को बंद करने के आदेश दे। सीबीआई के वकील ने आईटीएटी के फैसले पर भी अपनी प्रतिक्रिया न्यायालय के सामने जाहिर करते हुए कहा कि आईटीएटी की तरफ से की गई तफ्तीश एक तरह का प्रशासनिक मामला है।ऐसे में सीबीआई इस फैसले पर ध्यान देकर भी क्वात्रोची के मुद्दे पर कोई फायदा नहीं ले सकती क्योंकि भारत में क्वात्रोची का प्रत्यर्पण केवल इस खुलासे के साथ नहीं कराया जा सकता।
सरकारी वकील की पूरी सफाई सुनने के बाद अदालत ने केस की सुनवाई बंद करने की सीबीआई की मांग को खारिज करते हुए फैसला सुनाया कि फिलहाल इस केस को बंद नहीं किया जायेगा, मामले पर सुनवाई फिर से अदालत में होगी और सीबीआई इस मामले में सारी तफ्तीश फिर से पूरी करे।अदालत ने सीवीआई को इस दरम्यान फटकार लगाते हुए कहा कि मामले में अगली सुनवाई 10 फरवरी तक होगी। ऐसे में सीबीआई की जिम्मेवारी बनती है कि इस मुद्दे पर अपना और सरकार की निष्पक्षता साबित करे।
न्यायालय ने सीबीआई से यह कहा कि वह जानना चाहती है कि उसने पूरी ईमानदारी से इस पूरे मामले की जॉच की थी या नहीं।साथ हीं न्यायालय ने सीबीआई को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इसकी भी जॉच की जायेगी कि क्या जनहित को ध्यान में रखकर इस मुद्दे में फैसला लिया गया है, इसके अलावे जो कुछ भी तथ्य या चीजें अदालत के सामने इस जॉच के दरम्यान रखी गई वह सही तरीके से पेश की गई या नहीं ।
यानि पूरी तरह से सीबीआई की निष्पक्षता पर अदालत ने प्रश्नचिन्ह लगा कर ये साफ कर दिया कि जब तक अदालत इन सवालों के जबाब या तो जान नहीं लेती या जब तक उसे इस के बारे में स्पष्ट सफाई नहीं मिल जाती केस की क्लोजर रिपोर्ट के बारे में सीबीआई न हीं सोचे तो बेहतर है। ऐसे में न्यायालय के इस ब्यबहार से उसकी मंशा स्पष्ट हो गयी है कि जब तक इस मामले में सीबीआई कोई स्पष्ट नतीजे से न्यायालय को अवगत नहीं करा देते तब तक न्यायालय इस मामले में सीबीआई और अन्य सरकारी जॉच एजेंसियों का पीछा इस मुद्दे से छुड़ाने की तमाम कोशिशें नाकाम करता रहेगा।

...................................................गंगेश कुमार ठाकुर

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